समाजशास्त्र की वास्तविक प्रकृति

समाजशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है प्राकृतिक विज्ञान नहीं-समाजशास्त्र काय सम्बन्य समाज, सामाजिक घटनाओं, सामाजिक प्रक्रियाओं, सामाजिक सम्बन्धों तथा अन्य गुट सामाजिक पहलुओं से है, अतः समाजशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है। प्रत्यक्ष रूप से इसका ान,प्राकृतिक या भौतिक वस्तुओं से कोई सम्बन्ध नहीं है, अतः यह प्राकृतिक विज्ञान नहीं है। समाजशास्त्र स्वयं सम्पूर्ण सामाजिक विज्ञान नहीं है, अपितु सामाजिक विज्ञान को एक शाखा है। समाजशास्त्र एक वास्तविक (निश्चयात्मक) विज्ञान है आदर्शात्पक नहीं समाजशास्त्र वास्तविक घटनाओं का अध्ययन, जिस रूप में वे है, करता है तथा विश्लेषण में किसी आदर्श को प्रस्तुत नहीं करता या अध्ययन के समय किसी आदर्शात्मक दृष्टिकोण को नहीं ।अपनाता, अत: यह एक वास्तविक विज्ञान है,आदर्शात्मक नहीं। अवलोकन प्रविपि द्वारा आंकड़ों के संकलन तथा कार्य-कारण सम्बन्धों के अध्ययन पर बल देने के कारण भी यह एक वास्तविक विज्ञान है।

समाजशास्त्र इस बात का अध्ययन नहीं करता कि क्या होना चाहिये अपितु इस बात का अध्यन करता है कि वास्तविक सिथिति क्या है।समाजशास्त्र अमूर्त विज्ञान है, मूर्त विज्ञान नहीं अन्य सामाजिक विज्ञानों की तरह समाजशास्त्र एक अमूर्त विज्ञान है, क्योंकि इसको विषय-वस्तु जैसे समाज,सामाजिक सम्बन्यों, सामाजिक संस्थाओं, प्रथाओं, विश्वास इत्यादि को देखा या छुआ नहीं जा सकता । उदाहरण के लिए संस्थाओं को हाथ में लेकर नहीं देखा जा सकता और न ही प्रथाओं को तराज में तोला जा सकता है। समाज भी अमूर्त है, क्योंकि इसे सामाजिक सम्बन्धों (जो कि स्वयं अमूर्त है) का ताना बाना माना गया है। अतः समाजशास्त्र एक अमूर्त विज्ञान है, मूर्त नहीं । रोबर्ट बीरस्टीड का कहन है कि समाजशास्त्र मानवीय घटनाओं के मूर्त प्रदर्शन में विश्वास न रखकर उन स्वरूपों प्रतिमानों को मान्यता देता है जो घटना विशेष से सम्बन्धित हैं।

 

समाजशास्त्र एक विशुद्ध विज्ञान है व्यावहारिक विज्ञान नही-समाजशास्त्र विशुद्ध विज्ञान है, क्योंकि इसका प्रमुख उद्देश्य मानव समाज से सम्बन्धित सामाजिक घटनाओं का अध्ययन, विश्लेषण एवं निरूपण कर ज्ञान का संपर्क करना है। विशुद्ध विज्ञान चूंकि सैद्धान्तिक होता है इसलिये इसके द्वारा संचित ज्ञान अनिवार्य रूप से व्यावहारिक उपयोग में नहीं लाया सकता । रोबर्ट बीरस्टीड ने स्पष्ट कर दिया है कि इसका यह अर्घ कदापि नहीं है कि समाजशाल व्यर्थ या व्यावहारिक विज्ञान है, परन्तु समाजशास्त्र की इसमें कोई रुचि नहीं है कि प्राप्त ज्ञान का प्रयोग व्यावहारिक क्षेत्रों पर कैसे किया जा सकता है।समाजशास्त्र तार्किक एवं आनुभाविक विज्ञान है-समाजशास्त्र कों एवं अनुभव पर आधारित एक विज्ञान है। इसमें सामाजिक घटनाओं एवं तथ्यों की त्तकों के आघार पर व्याख की जाती है। साथ ही इसमें अध्ययन अनुसंधान क्षेत्र में जाकर किया जाता है, पुस्तकालय में बेठकर नहीं, अत: यह अनुभवाश्रित भी है।

समाजशास्त्र किसी भी सनी-सनाई अथवा कही गई बात पर विश्वास नहीं करता वां स्वयं जाच एवं विश्लेषण करके सत्यता की पष्टि करता है। समाजशास्त्र के निष्कर्ष विवेकपूर्ण तथा अनुभव पर आधारित होते हैं। यह सत्य है कि समाजशास्त्र तर्क के आधार पर वास्तविक घटनाओं का अध्ययन करता है, लेकिन इसके साथ-साथ अनुभव के आधार परकम उपयोगी तथ्यों की पूर्णतः:उपेक्षा भी नहीं करता है।समाजशास्त्र सामान्य विज्ञान है विशेष विज्ञान नहीं-समाजशास्त्र में सामाजिक जीवन की सामान्य घटनाओं का सामान्यीकरण करके, सामान्य नियमों का निर्माण किया जाता है जो सामान्य परिस्थितियों में सामान्य रूप से लागू होते हा अतः समाजशास्त्र एक सामान्य विज्ञान है , विशेष विज्ञान नही।

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